भोजन मे रोटी का महत्त्व है इस की महक बडी मनमोहक होती है इस के चलते अमेरिका में भीषण रक्तपात सुख था सुख यह था कीवहां के मिशीगन राज्य मे बापरे कंबरडे मे रोटी की महक मिळते ही एक पेग इंडियन व्यक्ती रोटी मांगने गया जब उसे रोटी नहीं थी गयी तो वह आग बंडूला हो गया और उसने जबरदस्त नरसंहार कर डाव यह कभी पता नहीं चल सका है कि रोटी बनावे की कला कब और कमान सुरू सुई है अनुमान किया जाता है की आज से आठ हजार वर्ष पुर्व झील के इस पास रहने वाले लोग ने पहले पहले रोटी बनावी होगी उन लोगो न ने पथतर पर रोटी सेकने और आटा टीमने का तरिका खोत की होगी वैसे अमेरिका के मेट्रोपॉलिटन कल संग्रहालय को साढे तीन सौहजार वर्ष बाद रोटी के कुकडे मिले हैं उधका आकार व प्रकार आज की राई की रोटीयों के समान ही है यहूदी भी रोटी बनाने की कला वही से ले आये फलस्वरूप व्हा रैटी और नानबाई की अनेको दुकाने खुली युनानी भी रोटी बनावे की कला मे शिंपून हो गये और 72प्रकार की रोटीयां बनाने लगे सुरू मे मंटो और अस्थानो मे तंदूर लगायें गये फिर बाद में गिरजाघरों मे सफेद रोटी परोसी गयी और यही से रोटी विशिष्ट लोगों को भोजन मे बनी रोटी कला के विकास मे रोमवासियों का भी योगदान है उन्होंने आटा गुरूने और टीमने की मशीने ईजाद की घोडे और गंधे इस मशीनों को घराणे ते गरीबों को रोटीयां मुफ्त दिवाळी जाने लगी उस समय युरोप मे आमतौर से लोग सफेद और काली रोटी खाकर पेट भरते ते लोगों की सभ्यता की तरह रोटीयां भी भिन्न भिन्न प्रकार की होती है जिल्हे देखील आसानी से पता लगातार जा सकता है कि ले किस देश की है इटली की किशमिश वाली पानोतोन रोटी लोकप्रिय है छडी तैसी आकार वाली गिसीन रोटी भी अच्छी होती है जर्मनी के लोग राई को रोटीयां बनावे मे सिद्धहस्त है इन रोटीयों को पेपरनिकल कहते हैं ये कडी और काले रंग की होती है इन मे से कुछ रोटीयां मुलायम होती है इसवी तरह अन्य देशों की रोटीयां मे भी भिन्नता है जैसे हमारे देश भारत की गोल चपाती मध्यम आयरलेंड की सोडे की रोटी रोम की चपटी और मतदार रोटी इंग्लंड की एक दुसरे उपर रंगी गोल बडी और हलकी रोटीhtttpa// roti ki dilchashpi
बुधवार, २९ जानेवारी, २०२०
रोटी का दिलचस्प इतिहास
भोजन मे रोटी का महत्त्व है इस की महक बडी मनमोहक होती है इस के चलते अमेरिका में भीषण रक्तपात सुख था सुख यह था कीवहां के मिशीगन राज्य मे बापरे कंबरडे मे रोटी की महक मिळते ही एक पेग इंडियन व्यक्ती रोटी मांगने गया जब उसे रोटी नहीं थी गयी तो वह आग बंडूला हो गया और उसने जबरदस्त नरसंहार कर डाव यह कभी पता नहीं चल सका है कि रोटी बनावे की कला कब और कमान सुरू सुई है अनुमान किया जाता है की आज से आठ हजार वर्ष पुर्व झील के इस पास रहने वाले लोग ने पहले पहले रोटी बनावी होगी उन लोगो न ने पथतर पर रोटी सेकने और आटा टीमने का तरिका खोत की होगी वैसे अमेरिका के मेट्रोपॉलिटन कल संग्रहालय को साढे तीन सौहजार वर्ष बाद रोटी के कुकडे मिले हैं उधका आकार व प्रकार आज की राई की रोटीयों के समान ही है यहूदी भी रोटी बनाने की कला वही से ले आये फलस्वरूप व्हा रैटी और नानबाई की अनेको दुकाने खुली युनानी भी रोटी बनावे की कला मे शिंपून हो गये और 72प्रकार की रोटीयां बनाने लगे सुरू मे मंटो और अस्थानो मे तंदूर लगायें गये फिर बाद में गिरजाघरों मे सफेद रोटी परोसी गयी और यही से रोटी विशिष्ट लोगों को भोजन मे बनी रोटी कला के विकास मे रोमवासियों का भी योगदान है उन्होंने आटा गुरूने और टीमने की मशीने ईजाद की घोडे और गंधे इस मशीनों को घराणे ते गरीबों को रोटीयां मुफ्त दिवाळी जाने लगी उस समय युरोप मे आमतौर से लोग सफेद और काली रोटी खाकर पेट भरते ते लोगों की सभ्यता की तरह रोटीयां भी भिन्न भिन्न प्रकार की होती है जिल्हे देखील आसानी से पता लगातार जा सकता है कि ले किस देश की है इटली की किशमिश वाली पानोतोन रोटी लोकप्रिय है छडी तैसी आकार वाली गिसीन रोटी भी अच्छी होती है जर्मनी के लोग राई को रोटीयां बनावे मे सिद्धहस्त है इन रोटीयों को पेपरनिकल कहते हैं ये कडी और काले रंग की होती है इन मे से कुछ रोटीयां मुलायम होती है इसवी तरह अन्य देशों की रोटीयां मे भी भिन्नता है जैसे हमारे देश भारत की गोल चपाती मध्यम आयरलेंड की सोडे की रोटी रोम की चपटी और मतदार रोटी इंग्लंड की एक दुसरे उपर रंगी गोल बडी और हलकी रोटीhtttpa// roti ki dilchashpi
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